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पौंड्रक

कथाएँ एवं घटनाएँ

करूष देश का राजा पौंड्रक स्वयं को ही 'वासुदेव' घोषित करके श्रीकृष्ण जैसी वेश-भूषा धारण करने लगा। उसने दूत द्वारा श्रीकृष्ण को संदेश भेजा कि वे उसकी शरण में आ जाएँ, क्योंकि असली वासुदेव वही है।

यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कन्ध में वर्णित है। इसके साथ उसका मित्र वाराणसी का राजा काशिराज भी था, जिसने द्वारका पर आक्रमण करके कृष्ण के पुत्रों का अपहरण कर लिया।

मुख्य पात्र पौंड्रक, काशिराज और कृष्ण हैं। श्रीकृष्ण ने द्वारका के बाहर पौंड्रक का सामना किया; उसने कृष्ण पर दिव्य आयुध चलाए, पर श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया। तत्पश्चात काशिराज का भी अंत हुआ और अपहृत पुत्र लौटाए गए। कथा का महत्व यह है कि भगवान के समान बनने का दंभ करने वाले का अंत पतन ही होता है।

प्रसिद्ध कथन

(भावानुवाद) मैं ही वासुदेव हूँ; तुम मेरी शरण में आ जाओ।

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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – दशम स्कन्ध