कीचक वध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: कीचक वध, सैरंध्री प्रसंग
अज्ञातवास के समय द्रौपदी सैरंध्री के वेश में विराट की रानी सुदेष्णा के पास रहती थी। विराट की साली और कीचक की बहन से द्रौपदी की शिकायत के बाद कीचक उस पर कुदृष्टि रखने लगा।
कीचक ने बलपूर्वक द्रौपदी को अपने भवन बुलाकर उसका अपमान करना चाहा। द्रौपदी ने सभा में कीचक की शिकायत की, पर राजा विराट ने कीचक के प्रभाव के कारण कोई न्याय नहीं दिया।
द्रौपदी ने रसोइये के वेश में रह रहे भीम से सहायता माँगी। भीम ने द्रौपदी को आश्वासन दिया और रात्रि में नृत्यशाला में कीचक से मिलने का प्रबंध किया।
वहाँ भीम ने कीचक को पकड़कर उसका वध कर दिया और शव को ऐसे छिपाया कि लोग उसे गंधर्व के प्रकोप से हुई मृत्यु मान बैठे। इससे अज्ञातवास में पांडवों की पहचान सुरक्षित रही।
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स्रोत: महाभारत – विराट पर्व