सौप्तिक युद्ध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: सौप्तिक पर्व, निशीथ युद्ध, रात्रि-संहार
गदा-युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु के बाद अश्वत्थामा, कृपाचार्य और कृतवर्मा युद्ध-भूमि के निकट रुके थे। दुर्योधन की मृत्यु और अपने पिता द्रोण के वध से क्रुद्ध अश्वत्थामा ने पांडवों पर प्रतिशोध का संकल्प किया।
अश्वत्थामा ने रात्रि में पांडव-शिविर पर आक्रमण किया। शिविर के द्वार पर रखे हुए शिव की शक्ति तथा निशाचरों को मारते हुए वह भीतर पहुँचा और सोए हुए पांडव-सैनिकों, द्रौपदी के पाँचों पुत्रों (उपपांडवों) तथा धृष्टद्युम्न और शिखंडी का वध किया।
अश्वत्थामा ने यह सोचकर कि पांडव भी मारे गए, उनका भी संहार किया, पर वस्तुतः पांडव उस रात्रि शिविर से बाहर थे। जब प्रातः पांडवों को इस संहार का पता चला तो उन्हें अत्यंत शोक और क्रोध हुआ।
द्रौपदी ने अपने पुत्रों की मृत्यु से व्याकुल होकर अश्वत्थामा के वध की माँग की। भीम ने अश्वत्थामा का पीछा किया और उसे पकड़कर बाँधा। श्रीकृष्ण और व्यास के समझाने पर अश्वत्थामा को जीवनदान दिया गया, पर उसकी मस्तक की दिव्य मणि छीन ली गई और उत्तरा के गर्भ पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करने के कारण उसे शाप दिया गया।
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स्रोत: महाभारत – सौप्तिक पर्व