कंस वध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: कंस का वध, मथुरा लीला
कृष्ण और बलराम गोकुल में बड़े हुए और अनेक असुरों का वध किया। अंततः कंस ने उन्हें मथुरा आने का निमंत्रण दिया, जो उसकी योजना के अनुसार उन्हें मरवाने का षड्यंत्र था। मथुरा में धनुष-यज्ञ का आयोजन हुआ।
कृष्ण और बलराम मथुरा पहुँचे। कृष्ण ने यज्ञ-धनुष को सहज ही तोड़ दिया। कंस ने उन्हें मरवाने के लिए पागल हाथी छुड़ाया और मल्ल-योद्धाओं को भेजा, पर कृष्ण और बलराम ने उन सबको परास्त किया।
मल्ल-युद्ध में बलराम ने मुष्टिक का और कृष्ण ने चाणूर का वध किया। तब कृष्ण सीधे मंच पर पहुँचे और अत्याचारी कंस को पकड़कर उसका वध कर दिया।
कंस का वध करके कृष्ण ने उसके पिता उग्रसेन को पुनः मथुरा का राजा बनाया और अपने माता-पिता देवकी-वसुदेव को कारागार से मुक्त कराया। इसके बाद कंस की पत्नियों के पिता जरासंध ने कृष्ण से शत्रुता ठानी। यह प्रसंग अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक है।
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – दशम स्कन्ध