धृतराष्ट्र का वनगमन
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: धृतराष्ट्र वनगमन, आश्रमवास, धृतराष्ट्र-गांधारी वनयात्रा
कुरुक्षेत्र युद्ध में सौ पुत्रों के विनाश से धृतराष्ट्र का हृदय शोक से भर गया। युधिष्ठिर से आज्ञा लेकर उन्होंने गांधारी, कुंती, विदुर तथा अन्य वृद्ध जनों के साथ राजपाट छोड़कर वन में प्रस्थान किया, जहाँ उन्होंने संन्यास और तप का जीवन अपनाया।
यह प्रसंग महाभारत के आश्रमवासिक पर्व में विस्तार से वर्णित है। वन में विदुर ने योग-बल से देह त्याग कर सिद्धि प्राप्त की, और बाद में धृतराष्ट्र, गांधारी तथा कुंती दावानल में प्राण त्याग कर परलोक गए।
मुख्य पात्र धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती, विदुर और युधिष्ठिर हैं। संजय तथा महर्षि व्यास ने उन्हें वन में दर्शन देकर उपदेश दिया। इस कथा का महत्व यह है कि वानप्रस्थ आश्रम के कर्तव्य और वैराग्य का आदर्श प्रस्तुत होता है; सांसारिक मोह से मुक्ति ही शांति का मार्ग है।
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स्रोत: महाभारत – आश्रमवासिक पर्व