गीता उपदेश
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: भगवद्गीता, गीता, श्रीमद्भगवद्गीता
कुरुक्षेत्र के युद्ध के आरंभ में श्रीकृष्ण ने अर्जुन का रथ दोनों सेनाओं के बीच खड़ा कराया। वहाँ अर्जुन ने अपने ही कुलबंधुओं, गुरुओं और भाइयों को युद्ध के लिए तैयार देखा।
आत्मीयजनों को मरने के लिए खड़ा देखकर अर्जुन का मन मोह और शोक से भर गया; उसने धनुष त्याग दिया और युद्ध से हट गया। तब श्रीकृष्ण ने उसे सारथी के स्थान से ज्ञान का उपदेश दिया — यही श्रीमद्भगवद्गीता है।
गीता में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को आत्मा की अमरता, कर्मयोग (फल की आसक्ति छोड़कर कर्म करना), ज्ञानयोग, भक्तियोग और सांख्य-योग का उपदेश दिया। उन्होंने बताया कि स्वधर्म का पालन करना और कर्तव्य-कर्म करना ही श्रेष्ठ है।
गीता उपदेश सुनकर अर्जुन का मोह नष्ट हुआ और उसने युद्ध के लिए संकल्प किया। यह उपदेश केवल युद्ध तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का ग्रंथ है और महाभारत का सबसे प्रसिद्ध अध्यात्मिक अंश है।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: महाभारत – भीष्म पर्व