वाली वध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: वाली का वध, सुग्रीव-वाली युद्ध
सुग्रीव और उसके बड़े भाई वाली में वैमनस्य था। वाली ने सुग्रीव को राज्य से बेदखल कर दिया था और सुग्रीव की पत्नी रुमा को भी अपने पास रख लिया था।
राम के वचन के अनुसार सुग्रीव ने वाली को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों भाइयों में भीषण द्वंद्व हुआ, पर वे एक-से दिखने के कारण राम पहचान नहीं पा रहे थे। तब सुग्रीव ने एक पहचान-चिह्न (माला) धारण किया और राम ने छिपकर वाली पर बाण मारा।
मरणासन्न वाली ने राम से प्रश्न किया कि उन्होंने बिना किसी शत्रुता के, छिपकर उस पर बाण क्यों चलाया। राम ने उत्तर दिया कि वाली ने अपने छोटे भाई की पत्नी का हरण करके अधर्म किया, और धर्म की रक्षा हेतु उसे दंड देना उचित था।
वाली ने राम की महिमा स्वीकार की और अपने पुत्र अंगद को राम की शरण में सौंप दिया। पत्नी तारा और वानर-समाज ने विलाप किया। अंततः किष्किन्धा का राज्य सुग्रीव को मिला और अंगद युवराज बने।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – किष्किन्धाकाण्ड