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गणेश जन्म

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: गणपति जन्म, श्रीगणेश का प्रादुर्भाव

रुद्रसंहितागणेशपार्वतीशिव

एक बार माता पार्वती ने स्नान से पूर्व अपने शरीर के उबटन (मल) से एक सुंदर बालक की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण डालकर उसे द्वार पर पहरे के लिए नियुक्त किया। बालक ने आज्ञा के अनुसार किसी को भी भीतर नहीं जाने दिया।

भगवान शिव जब आए तो बालक ने उन्हें भी रोका। दोनों में विवाद बढ़ा और शिव ने क्रुद्ध होकर बालक का शीश काट दिया। यह देखकर पार्वती अत्यंत दुःखी और क्रुद्ध हुईं।

पार्वती को शांत करने के लिए शिव ने आदेश दिया कि जो प्राणी उत्तर दिशा में माता की उपेक्षा करके सो रहा हो, उसका सिर लाया जाए — और एकमात्र गजराज (हाथी) का सिर लाया गया। उसे बालक के धड़ पर जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित किया गया, और वे गजानन कहलाए।

शिव ने उन्हें गणों का अधिपति (गणपति) बनाया और प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। एक अन्य प्रसंग में गणेश का एक दाँत परशुराम के प्रहार से टूटा तथा चंद्रमा के हँसने पर गणेश ने उसे शाप दिया। गणेश जन्म को नई सृष्टि, बुद्धि और विघ्नहर्ता-भाव का प्रतीक माना जाता है।

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स्रोत: शिव पुराण – रुद्रसंहिता