अश्वमेध यज्ञ
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: अश्वमेध, अश्वमेधिक पर्व
युद्ध में कुल-क्षय के पाप से पीड़ित युधिष्ठिर को व्यास आदि ने प्रायश्चित्त के रूप में अश्वमेध यज्ञ करने का परामर्श दिया।
यज्ञ के लिए धन की आवश्यकता थी; व्यास के कहने पर पांडवों ने दिग्विजय करके तथा हिमालय में मरुत्त-यज्ञ की शेष सामग्री लाकर धन जुटाया। फिर यज्ञ का अश्व छोड़ा गया और अर्जुन अश्व की रक्षा के लिए उसके साथ देश-देश घूमने लगे।
अश्व का अनुसरण करते हुए अर्जुन ने अनेक राजाओं को पराजित किया। त्रिगर्त के राजा केतुवर्मा ने अश्व पकड़ा, पर अर्जुन ने उसे परास्त करके युधिष्ठिर की अधीनता स्वीकार कराई। इसी यात्रा में अर्जुन का अपने पुत्र बभ्रुवाहन से युद्ध भी हुआ।
अंत में युधिष्ठिर का अश्वमेध यज्ञ विधिपूर्वक पूर्ण हुआ। यह यज्ञ राज्य की धर्म-सम्मत पुनर्स्थापना और युधिष्ठिर की सार्वभौम सत्ता का प्रतीक था।
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स्रोत: महाभारत – अश्वमेध पर्व