वामन-बलि कथा
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: वामन, राजा बलि
वामन-बलि की कथा अहंकार के त्याग और भक्ति की कथा है। दैत्यराज बलि ने अश्वमेध यज्ञ किया, तब विष्णु ने वामन ब्राह्मण का रूप धारण कर यज्ञ में पहुँचकर तीन पग भूमि माँगी।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कन्ध तथा वामन पुराण में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र वामन, राजा बलि, शुक्राचार्य और प्रह्लाद हैं।
वामन ने दो पगों में पृथ्वी और आकाश नाप लिया, तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर झुका दिया। बलि को पाताल लोक दिया गया, पर वह सुतल लोक में अमर राजा बना। यह कथा दान, भक्ति और अहंकार के नाश का प्रतीक है।
प्रसिद्ध कथन
बलि ने कहा – हे वामन, आप मेरे अतिथि हैं, जो चाहें माँग लीजिए। (भावानुवाद)
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – अष्टम स्कन्ध