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बाणासुर कथा

कथाएँ एवं घटनाएँ

अन्य नाम: बाणासुर, बाण

कृष्णशिवदैत्यअहंकार

बाणासुर की कथा अहंकार और भक्ति की कथा है। दैत्यराज बलि के पुत्र बाणासुर को शिव से सहस्र भुजाओं का वरदान मिला और वह अत्यंत अहंकारी हो गया।

यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कन्ध तथा हरिवंश में वर्णित है। कथा के मुख्य पात्र बाणासुर, उषा, अनिरुद्ध, शिव और कृष्ण हैं।

बाणासुर की पुत्री उषा और कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध का विवाह हुआ, पर बाणासुर ने अनिरुद्ध को बंदी बना लिया। इससे शिव और कृष्ण के बीच युद्ध हुआ और बाणासुर की भुजाएँ काट दी गईं। अंत में बाणासुर शिव की कृपा से बचा और शिव-गण बना। यह कथा अहंकार के नाश और भक्ति की रक्षा का प्रतीक है।

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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – दशम स्कन्ध