धेनुकासुर वध
कथाएँ एवं घटनाएँ
धेनुकासुर एक असुर था जो गधे का रूप धरकर तालवन (ताल-वृक्षों के वन) में रहता था और वहाँ के किसी को प्रवेश नहीं देता था। उस वन के ताल-फलों को कोई नहीं खा सकता था।
यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के दशम स्कन्ध में वर्णित है। ग्वाल-बालों ने श्रीकृष्ण और बलराम से तालवन के सुगंधित फलों की इच्छा प्रकट की, और दोनों भाई उन्हें लेकर वन की ओर चल पड़े।
मुख्य पात्र बलराम, कृष्ण और धेनुकासुर हैं। जैसे ही बलराम वन में घुसे, धेनुकासुर ने उन पर आक्रमण किया; बलराम ने उसके पैर पकड़कर उसे वृक्षों पर पटक-पटक कर मार डाला। तब वन का भय दूर हुआ और ग्वालों ने ताल-फल खाए। कथा का महत्व यह है कि भगवान और बलराम अपने भक्तों के सुख के लिए कठिन से कठिन शत्रु का भी वध करते हैं।
संबंधित
स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – दशम स्कन्ध