पूतना वध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: पूतना का वध
कृष्ण के जन्म का पता लगाने और उन्हें मारने के लिए कंस ने राक्षसी पूतना को गोकुल भेजा। पूतना सुंदर स्त्री का रूप धारण करके नंद-भवन पहुँची।
यशोदा और गोकुलवासी उसके रूप पर मोहित होकर उसे शिशु को गोद में लेने देते हैं। पूतना ने कृष्ण को गोद में लेकर अपने विष-युक्त स्तन से दूध पिलाने का प्रयास किया।
परंतु शिशु कृष्ण ने क्रोधपूर्वक स्तन पकड़कर दूध के साथ पूतना के प्राण भी हर लिए। पूतना अपने वास्तविक विशाल राक्षसी रूप में पृथ्वी पर गिर पड़ी और उसका वध हो गया।
यह प्रसंग शिशु कृष्ण की दिव्य शक्ति का पहला प्रकट प्रमाण है, जिससे गोकुलवासी अचंभित रह गए। पूतना को भी कृष्ण के स्पर्श से उद्धार मिला, जिसे श्रीमद्भागवत में कृष्ण की अहेतुक कृपा का उदाहरण बताया गया है।
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – दशम स्कन्ध