जयद्रथ वध
कथाएँ एवं घटनाएँ
अन्य नाम: जयद्रथ वध, प्रतिज्ञा पर्व
अभिमन्यु की मृत्यु में जयद्रथ का बड़ा हाथ था, क्योंकि उसने चक्रव्यूह का द्वार रोककर पांडवों को भीतर आने से रोका था। इससे क्रुद्ध होकर अर्जुन ने प्रतिज्ञा की कि यदि वे अगले दिन सूर्यास्त से पूर्व जयद्रथ का वध न कर सके तो अग्नि में प्रवेश करेंगे।
जयद्रथ भयभीत होकर कौरव-शिविर में छिप गया। दुर्योधन और द्रोण ने जयद्रथ की रक्षा के लिए अनेक योद्धाओं को चारों ओर तैनात किया।
अर्जुन ने कृष्ण के सारथ्य में भीषण संग्राम किया और बड़ी संख्या में कौरव योद्धाओं को पराजित किया। जब दिन ढलने लगा और जयद्रथ छिपा रहा, तब श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से सूर्य को अस्त होता दिखाया।
यह देखकर जयद्रथ प्रसन्न होकर छिपने से बाहर निकला। तभी श्रीकृष्ण ने अर्जुन को संकेत दिया और अर्जुन ने जयद्रथ का सिर काट दिया। कृष्ण की माया से उसका सिर जयद्रथ के पिता की गोद में जा गिरा। इस प्रकार अर्जुन की प्रतिज्ञा पूर्ण हुई।
प्रसिद्ध कथन
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स्रोत: महाभारत – द्रोण पर्व