शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

बाणासुर

वेद एवं पुराण

अन्य नाम: बाण, बाणा

असुरशिव-भक्तसहस्र-भुजाअनिरुद्ध

बाणासुर (बाण) असुरराज बलि (महाबली) का सहस्र-भुजा वाला पुत्र था। वह शोणितपुर का राजा और भगवान शिव का परम भक्त था।

वह प्रह्लाद के वंश में उत्पन्न हुआ और भागवत पुराण तथा शिव पुराण में उसकी कथा विस्तार से मिलती है। उसने तपस्या से शिव को प्रसन्न करके उन्हें अपने नगर का रक्षक बनाया और अजेयता का वर पाया।

उसकी पुत्री ऊषा को स्वप्न में कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध से प्रेम हुआ। चित्रलेखा ने अनिरुद्ध को शोणितपुर पहुँचा दिया, जिससे बाणासुर ने उसे बंदी बना लिया। तब कृष्ण ने शोणितपुर पर आक्रमण किया और शिव के विरोध के बावजूद बाणासुर की अतिरिक्त भुजाएँ काट डालीं। अंत में अनिरुद्ध और ऊषा का विवाह हुआ।

नाते-रिश्ते

  • पिता: महाबली (बलि)
  • पुत्री: ऊषा
  • जामाता: अनिरुद्ध

प्रसिद्ध कथन

हे महादेव! आपने जो मुझे हजार भुजाएँ दीं, वे मुझे भार लगती हैं; त्रिलोकी में आपके अतिरिक्त मेरा जोड़ का योद्धा कोई नहीं। (भावानुवाद)

संबंधित

शिवश्रीकृष्ण जन्मप्रह्लाद

स्रोत: शिव पुराण – रुद्र संहिता; श्रीमद्भागवत (दशम स्कंध)