कुरु
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: राजा कुरु, कुरु नरेश
कुरु राजा संवरण और तपती के पुत्र थे और चंद्रवंश की 'कुरु' शाखा के प्रवर्तक माने जाते हैं। इनके नाम से कुरुवंश, कुरुक्षेत्र तथा कुरुजांगल जैसे नाम प्रचलित हुए।
कथा है कि कुरु ने कुरुक्षेत्र की भूमि पर यज्ञ और तप किया तथा उसे धर्म-कार्यों के लिए पवित्र बनाया। इसी पुण्य भूमि पर आगे महाभारत का युद्ध हुआ।
कुरु की परंपरा में प्रतीप, शांतनु और भीष्म हुए तथा अंततः कौरव और पांडव इसी वंश में जन्मे। इस प्रकार कुरु उस वंश-वृक्ष की जड़ हैं जिस पर महाभारत की समस्त कथा टिकी है।
नाते-रिश्ते
- पिता: संवरण
- माता: तपती
- वंश: कुरुवंश
- वंशज: कौरव-पांडव
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स्रोत: महाभारत, विष्णु पुराण