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सगर

वेद एवं पुराण

अन्य नाम: राजा सगर, सगर चक्रवर्ती

इक्ष्वाकु वंशसूर्यवंशसाठ हजार पुत्रकपिलभगीरथ

सगर इक्ष्वाकु (सूर्यवंश) के राजा थे और राजा बाहु के पुत्र माने जाते हैं। इनका जन्म और्व ऋषि की कृपा से हुआ और बाल्यकाल में शत्रुओं द्वारा त्यागे जाने पर ये ऋषि के आश्रम में पले।

सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया, पर इंद्र ने यज्ञ का घोड़ा चुराकर छिपा दिया। सगर के साठ हजार पुत्रों ने घोड़े की खोज में पृथ्वी को खोद डाला और अंत में घोड़े को कपिल मुनि के आश्रम के पास पाया।

अश्व-चोरी का आरोप कपिल मुनि पर लगाने से क्रुद्ध होकर उन्होंने अपने तेज से सगर के सभी साठ हजार पुत्रों को भस्म कर दिया। पीढ़ियों बाद अंशुमान और फिर भगीरथ ने उनके उद्धार के लिए गंगा को पृथ्वी पर लाया। यह कथा रामायण के बालकाण्ड और विष्णु पुराण में मिलती है।

नाते-रिश्ते

  • पिता: बाहु
  • वंश: इक्ष्वाकु
  • पुत्र: अंशुमान
  • पुत्र: साठ हजार
  • वंशज: भगीरथ

प्रसिद्ध कथन

रामायण (बालकाण्ड) में सगर के अश्वमेध तथा कपिल द्वारा पुत्रों के भस्म होने की कथा है (भावानुवाद)।

संबंधित

इक्ष्वाकुभगीरथकपिलइंद्र

स्रोत: विष्णु पुराण, रामायण