पुरु
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: राजा पुरु, पौरव पुरु
पुरु ययाति और शर्मिष्ठा के पुत्र थे और चंद्रवंश की 'पौरव' शाखा के प्रवर्तक माने जाते हैं। यही शाखा आगे कुरु, भरत तथा कौरव-पांडवों तक पहुँचती है।
कथा है कि ययाति को अपनी वृद्धावस्था और रोग पुत्रों पर डालने की आवश्यकता हुई। सभी बड़े पुत्रों ने मना कर दिया, पर सबसे छोटे पुरु ने पिता की वृद्धावस्था स्वेच्छा से स्वीकार कर ली।
प्रसन्न होकर ययाति ने पुरु को अपना राज्य दिया और उनकी युवावस्था लौटा दी। पुरु युवा होकर चंद्रवंश के सम्राट बने और उनकी संतति से ही भरत और कुरु जैसे प्रतापी राजा हुए। यह कथा महाभारत के आदिपर्व और विष्णु पुराण में मिलती है।
नाते-रिश्ते
- पिता: ययाति
- माता: शर्मिष्ठा
- वंश: पौरव (चंद्रवंश)
- वंशज: कुरु व भरत
प्रसिद्ध कथन
महाभारत (आदिपर्व) में ययाति की वृद्धावस्था और पुरु द्वारा उसे स्वीकार करने का प्रसंग है (भावानुवाद)।
संबंधित
स्रोत: महाभारत, विष्णु पुराण