असुर
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: दैत्य, दानव, राक्षस
असुर देवों के प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं और पुराणों में इन्हें कश्यप की पत्नियों दिति से 'दैत्य' तथा दनु से 'दानव' के रूप में उत्पन्न बताया गया है।
प्रमुख असुरों में हिरण्यकशिपु, हिरण्याक्ष, बलि, रावण और कुंभकर्ण आदि आते हैं। इनमें प्रह्लाद जैसे भक्त भी हुए, जो असुर-वंश में जन्म लेकर भी विष्णु के परम भक्त बने।
देवासुर संग्राम और समुद्र मंथन असुरों की प्रमुख कथाएँ हैं। शुक्राचार्य असुरों के गुरु माने जाते हैं। वैदिक काल में 'असुर' शब्द कभी 'शक्तिशाली देव' के अर्थ में भी प्रयुक्त होता था, बाद में यह देवों के विरोधी के अर्थ में स्थिर हो गया।
नाते-रिश्ते
- पिता: कश्यप
- माता: दिति व दनु
- गुरु: शुक्राचार्य
- प्रतिद्वंद्वी: देव
प्रसिद्ध कथन
ऋग्वेद में वरुण, अग्नि आदि देवों के लिए 'असुर' विशेषण का प्रयोग शक्तिशाली के अर्थ में मिलता है (भावानुवाद)।
संबंधित
स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण, ऋग्वेद