सनत्कुमार
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: सनत्कुमार, सनत् कुमार, चार कुमार, सनकादि
सनत्कुमार ब्रह्मा के चार मानस पुत्रों — सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार — में से एक हैं। इन्हें 'चार कुमार' या 'सनकादि' भी कहा जाता है।
श्रीमद्भागवत (स्कंध 3, अध्याय 12) में वर्णन है कि ब्रह्मा ने सृष्टि-विस्तार के लिए इनसे विवाह करने को कहा, पर वे जन्म से ही वैराग्य और ज्ञान में स्थित थे, इसलिए उन्होंने नैष्ठिक ब्रह्मचर्य का व्रत लिया। इससे ब्रह्मा को क्रोध आया, जिससे रुद्र (शिव) प्रकट हुए।
ये सदा पाँच वर्ष के बालक रूप में रहते हैं और ज्ञान-प्रचार के लिए ब्रह्मांड में भ्रमण करते हैं। इनका निवास जनलोक बताया गया है। परंपरा में इन्होंने नारद को भागवत-ज्ञान सुनाया था।
इन्हें भगवान विष्णु के प्रथम अवतारों में गिना जाता है। वैकुंठ के द्वारपाल जय-विजय को इनके शाप देने की कथा भी प्रसिद्ध है।
नाते-रिश्ते
- पिता: ब्रह्मा
- भाई: सनक
- भाई: सनंदन
- भाई: सनातन
- निवास: जनलोक
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण (स्कंध 3), विष्णु पुराण