कुबेर
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: धनपति, यक्षराज, वैश्रवण, धनद, निधिपति
कुबेर हिन्दू परंपरा में धन, समृद्धि और निधियों के देवता तथा यक्षों के राजा हैं। वे आठ दिक्पालों में उत्तर दिशा के स्वामी (लोकपाल) हैं और देवताओं के कोषाध्यक्ष माने जाते हैं। उनका निवास अलकापुरी है, जिसे वसुधारा या वसुस्थली भी कहा जाता है।
वंश — ब्रह्मा के मानस पुत्र पुलस्त्य ऋषि उनके पितामह हैं; पिता विश्रवा और माता इलविला (देववर्णिनी) थीं। इसी कारण उन्हें वैश्रवण और पौलस्त्य कहा जाता है। रावण, कुंभकरण और विभीषण उनके सौतेले भाई थे। पत्नी का नाम ऋद्धि बताया गया है; पुत्र नलकूबर और मणिग्रीव तथा पुत्री मीनाक्षी मानी जाती हैं।
कथा — कुबेर पहले लंका में रहते थे, जिसे विश्वकर्मा ने बनाया था। ब्रह्मा से वरदान पाकर रावण ने लंका छीन ली और पुष्पक विमान भी ले लिया; तब कुबेर कैलाश के निकट अलकापुरी में बस गए। उनका उपवन चैत्ररथ और सरोवर नलिनी बताए गए हैं। शिव उनके मित्र माने जाते हैं और उनकी सभा में गंधर्व-अप्सराएँ आनंद करती हैं।
स्वरूप — उन्हें श्वेत विकृत देह वाला, तीन पैर, आठ दाँत और एक आँख वाला बताया गया है; हाथ में गदा और धन-पात्र रहता है। वाहन नर (मनुष्य) माना जाता है; कहीं-कहीं मेष, हाथी या रथ का भी उल्लेख मिलता है।
नाते-रिश्ते
- पिता: विश्रवा
- माता: इलविला
- पत्नी: ऋद्धि
- भाई: रावण
- वाहन: नर
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: विष्णु पुराण, वाल्मीकि रामायण, विष्णुधर्मोत्तर पुराण