शेषनाग
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: अनंत, अनंतनाग, शेष, आदिशेष, नागराज शेष
शेषनाग, जिन्हें अनंत भी कहा जाता है, नागों के राजा हैं और कश्यप तथा कद्रू की संतान माने जाते हैं। इनका शरीर विशाल और सहस्र मुखों (फणों) वाला बताया गया है। ये विष्णु के परम सेवक और उनके शयन-आसन हैं।
क्षीरसागर में विष्णु शेष की शय्या पर शयन करते हैं, इसीलिए उन्हें 'शेषशायी' कहा जाता है। मान्यता है कि शेष अपने फणों पर पृथ्वी को धारण करते हैं और प्रलय के समय भी अनंत रूप में स्थित रहते हैं, इसी से उनका नाम 'अनंत' पड़ा।
पुराणों में लक्ष्मण और बलराम को शेष का अंश या अवतार कहा गया है। समुद्र मंथन में जिस वासुकि नाग की रस्सी बनी, वे शेष के भाई माने जाते हैं। शेषनाग का वर्णन विष्णु पुराण और देवीभागवत पुराण में विस्तार से मिलता है।
नाते-रिश्ते
- पिता: कश्यप
- माता: कद्रू
- भाई: वासुकि
- अंश: लक्ष्मण व बलराम
- स्वामी: विष्णु
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
लक्ष्मण और बलराम में अंशावतार
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: विष्णु पुराण, देवीभागवत पुराण