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शिव

वेद एवं पुराण

अन्य नाम: महादेव, रुद्र, नीलकंठ, आदियोगी, शंकर, महेश, भोलेनाथ

देवतात्रिमूर्तिसंहारकशैवज्योतिर्लिंग

शिव त्रिमूर्ति में संहार के देवता हैं — पर परंपरा उन्हें 'संहारक' ही नहीं, संहार के माध्यम से पुनर्सृष्टि कराने वाला, तथा योग व तपस्या के आदि-आचार्य ('आदियोगी') मानती है। वेदों में उनका स्वरूप 'रुद्र' के रूप में मिलता है; ऋग्वेद का रुद्र सूक्त उन्हीं की स्तुति है। शिव पुराण, लिंग पुराण और स्कंद पुराण उनकी महिमा के प्रमुख स्रोत हैं।

उनका निवास कैलाश पर्वत है, वाहन नंदी (वृषभ), आयुध त्रिशूल और डमरू; हाथों में रुद्राक्ष की माला, गले में सर्प और जटा में गंगा। समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को उन्होंने पीकर कंठ में रोक लिया, इसीलिए वे 'नीलकंठ' कहलाए। सिर पर चंद्र और तीसरे नेत्र के कारण उन्हें 'त्र्यंबक' और 'चंद्रशेखर' कहा जाता है। पार्वती उनकी पत्नी हैं और गणेश-कार्तिकेय उनके पुत्र।

शिव का अर्धनारीश्वर रूप पुरुष व स्त्री (शिव-शक्ति) की एकता का प्रतीक है। बारह ज्योतिर्लिंग — सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, महाकाल (उज्जैन) आदि — शिव के सर्वाधिक पवित्र स्थान माने जाते हैं। शिव-लिंग की पूजा का प्रचलन अत्यंत प्राचीन है और इसे अनादि ब्रह्म का प्रतीक कहा गया।

शिव से जुड़े प्रसिद्ध प्रसंगों में दक्ष यज्ञ का विध्वंस, कामदेव का भस्मीकरण, समुद्र-मंथन में विषपान, पार्वती से विवाह, और भस्मासुर/बाणासुर आदि की कथाएँ हैं। शिव को 'भोलेनाथ' — शीघ्र प्रसन्न होने वाले और भक्त-वत्सल — कहा जाता है।

नाते-रिश्ते

  • पत्नी: पार्वती
  • पुत्र: गणेश, कार्तिकेय
  • वाहन: नंदी

प्रसिद्ध कथन

मूल मंत्र — "ॐ नमः शिवाय।"
रुद्र सूक्त का प्रसिद्ध महामृत्युंजय मंत्र — "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥" (ऋग्वेद, रुद्र सूक्त से)
ध्यान श्लोक — "कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"

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ब्रह्माविष्णुदुर्गागणेशदक्षकाशी

स्रोत: शिव पुराण; लिंग पुराण; ऋग्वेद (रुद्र सूक्त)