अत्रि
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: अत्रि ऋषि, अत्रिमुनि
अत्रि ब्रह्मा के मानस पुत्र और सप्तर्षियों में से एक हैं। वे वर्तमान वैवस्वत मन्वंतर के सप्तर्षियों में गिने जाते हैं।
उनकी पत्नी अनसूया थीं, जो पतिव्रत धर्म और तपस्या की प्रतिष्ठित प्रतीक मानी जाती हैं। उनके तीन पुत्र प्रसिद्ध हैं — दत्तात्रेय, दुर्वासा और सोम (चंद्र)। श्रीमद्भागवत (4.1.15) में यह वर्णन मिलता है।
ऋग्वेद में अत्रि के नाम पर सूक्त हैं और उन्हें अनेक मंत्रों का द्रष्टा माना जाता है। परंपरा में अत्रि को उस ऋषि के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने स्वर्भानु द्वारा छिपाए गए सूर्य को पुनः प्रकट किया।
वाल्मीकि रामायण में वन-प्रवास के समय राम ने अत्रि और अनसूया के आश्रम में दर्शन किए और अनसूया ने सीता को पतिव्रत धर्म का उपदेश दिया।
नाते-रिश्ते
- पिता: ब्रह्मा
- पत्नी: अनसूया
- पुत्र: दत्तात्रेय
- पुत्र: दुर्वासा
- पुत्र: चंद्र
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: ऋग्वेद, विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण, वाल्मीकि रामायण