मोहिनी
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: मोहिनी, विश्वमोहिनी, मोहिनी रूप
मोहिनी भगवान विष्णु का वह स्त्री-रूप है जो उन्होंने समुद्र मंथन के समय धारण किया था। अमृत को लेकर देव-असुरों में झगड़ा हुआ, तब विष्णु ने मोहिनी रूप धरकर असुरों को मोहित किया और अमृत देवताओं को पिला दिया।
विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत के अनुसार उस रूप के सौंदर्य पर देवता, असुर तथा स्वयं शिव तक मोहित हुए। मोहिनी के रूप में ही विष्णु ने असुर स्वर्भानु का सिर काटा, जिससे राहु और केतु बने।
परंपरा में 'मोहिनी' को विष्णु की माया-शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो असुरों के अहंकार को चूर करती है।
शिव-मोहिनी तथा मोहिनी से जुड़ी कुछ अन्य कथाएँ भी परंपरा में मिलती हैं।
नाते-रिश्ते
- रूप: विष्णु
- संबंधी: शिव
- जन्म: समुद्र मंथन
संबंधित
स्रोत: समुद्र मंथन प्रसंग, विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण