यम
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: यमराज, धर्मराज, पितृपति, अंतक, मृत्यु, काल
यम मृत्यु, काल और धर्म के देवता हैं — 'यमराज' या 'धर्मराज' के रूप में वे प्राणियों के कर्मों का लेखा रखते हैं और उन्हें गति (जन्म-मरण) प्रदान करते हैं। वैदिक काल में यम का रूप करुणामय था — वे पितरों के साथ पितृलोक में रहते और मृत आत्माओं को मार्ग दिखाते थे। पुराणों में वे न्यायाधीश और दंडदाता के रूप में प्रखर हो गए।
उनका निवास यमलोक (दक्षिण दिशा) है, वाहन महिष (भैंस) और आयुध दंड। वे दिक्पालों में दक्षिण के रक्षक हैं और सूर्य के पुत्र माने जाते हैं; यमुना उनकी बहन है। उनके लेखाकार चित्रगुप्त प्राणियों के पाप-पुण्य का ब्यौरा रखते हैं।
प्रसिद्ध प्रसंगों में — सवित्री द्वारा अपने पति सत्यवान को यम से वापस पाना, तथा कठोपनिषद का नचिकेता-यम संवाद (जिसमें यम नचिकेता को आत्मा की अमरता का ज्ञान देते हैं) प्रमुख हैं। यम को 'पितृपति' और 'संयमन' भी कहा जाता है।
यम की महिमा ऋग्वेद के यम-सूक्तों, कठोपनिषद तथा गरुड़ पुराण में विस्तृत है।
नाते-रिश्ते
- पिता: सूर्य
- माता: संज्ञा
- बहन: यमुना
- वाहन: महिष
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: ऋग्वेद; कठोपनिषद; गरुड़ पुराण