दुर्गा
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: आदिशक्ति, महिषासुरमर्दिनी, चंडी, अंबे, कात्यायनी, शक्ति
दुर्गा आदिशक्ति हैं — ब्रह्मांड की वह मूल ऊर्जा जिससे सृष्टि धारण करती है और दुष्ट शक्तियों का नाश होता है। शाक्त परंपरा में वे सर्वोच्च देवी हैं और ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों उन्हीं की शक्तियों से कार्य करते हैं। उनकी मुख्य स्तुति 'देवी माहात्म्य' (दुर्गा सप्तशती), जो मार्कंडेय पुराण का भाग है, में संकलित है।
उनका स्वरूप अष्टभुजा है — अनेक दिव्य आयुध धारण किए, सिंह (या बाघ) पर आरूढ़। हिमालय की पुत्री और मेनका की संतान के रूप में उनका जन्म वर्णित है; 'कात्यायनी' नाम कात्यायन ऋषि के आश्रम में उनकी उपासना से जुड़ा है। नवरात्रि में उनके नौ स्वरूपों (नवदुर्गा) — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — की पूजा होती है।
देवी माहात्म्य के अनुसार जब महिषासुर ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया, तब तीनों लोकों के तेज से दुर्गा प्रकट हुईं और नौ दिन के युद्ध में महिषासुर का वध किया। इसके बाद उन्होंने शुंभ-निशुंभ तथा रक्तबीज का संहार किया — रक्तबीज की बूँद से उत्पन्न होने वाले राक्षसों को काली के रूप में नष्ट किया गया। इसी विजय के स्मरण में विजयादशमी और दुर्गा पूजा मनाई जाती है।
दुर्गा की उपासना बंगाल की दुर्गा पूजा, गुजरात की गरबा-नवरात्रि और पूरे भारत की शक्ति-परंपरा में जीवंत है। काशी (विशालाक्षी), वैष्णो देवी और मैहर आदि उनके प्रमुख शक्तिपीठ/तीर्थ हैं।
नाते-रिश्ते
- पति: शिव
- पुत्र: गणेश, कार्तिकेय
- वाहन: सिंह
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
सती (दाक्षायणी) का पुनर्जन्म
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: मार्कंडेय पुराण (देवी माहात्म्य); दुर्गा सप्तशती