वायु
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: पवन, मरुत, प्राण, अनिल, वात
वायु वायु-तत्त्व तथा प्राण (जीवन-श्वास) के देवता हैं। पंचभूतों में वायु का स्थान महत्वपूर्ण है, और प्राणायाम की परंपरा में उन्हीं की उपासना होती है। वे इंद्र के सारथी तथा 'मरुतों' (तूफानी देवताओं) के स्वामी माने जाते हैं।
उनका वाहन मृग (हिरण) है और वे दिक्पालों में उत्तर-पश्चिम दिशा के रक्षक हैं। 'पवन' और 'अनिल' उनके प्रसिद्ध नाम हैं। उन्हें 'प्राणदेवता' भी कहा जाता है, क्योंकि सभी प्राणियों के भीतर श्वास उन्हीं की शक्ति से चलता है।
वायु से जुड़े सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रसंग रामायण और महाभारत के हैं — वायु हनुमान के दिव्य पिता हैं (अंजनी से) और भीम के पिता भी (कुंती से)। इसी कारण हनुमान और भीम दोनों असाधारण बल के स्वामी माने जाते हैं। हनुमान को 'वायुपुत्र' और 'पवनसुत' कहा जाता है।
वायु की स्तुति ऋग्वेद के वायु-सूक्तों में मिलती है, जहाँ उन्हें अमृत का पात्र ढोने वाला और इंद्र का सहचर कहा गया है।
नाते-रिश्ते
- पुत्र: हनुमान, भीम
- वाहन: मृग
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: ऋग्वेद; रामायण; महाभारत