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गणेश

वेद एवं पुराण

अन्य नाम: गणपति, विघ्नहर्ता, एकदंत, लंबोदर, विनायक, गजानन

देवतागणपतिविघ्नहर्ताप्रथम पूज्य

गणेश हिन्दू परंपरा में 'प्रथम पूज्य' हैं — किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ या पूजा से पूर्व उनका स्मरण अनिवार्य माना जाता है। वे विघ्नों के हर्ता (विघ्नहर्ता) और बुद्धि, विवेक तथा सिद्धि के दाता हैं। गणेश पुराण, शिव पुराण और मुद्गल पुराण उनकी कथा व महिमा के प्रमुख स्रोत हैं।

शिव पुराण के अनुसार गणेश का जन्म पार्वती के उबटन (मैल) से हुआ। माता के निर्देश पर उन्होंने शिव को भीतर प्रवेश से रोका, जिससे क्रुद्ध होकर शिव ने उनका सिर काट दिया। पार्वती के शोक पर शिव ने उत्तर दिशा में सोए हाथी का सिर जोड़कर उन्हें जीवन दिया — इसीलिए वे 'गजानन' कहलाए। उनका स्वरूप लंबोदर (बड़ा उदर), एकदंत (एक दाँत) और बड़े कानों वाला है; हाथों में पाश, अंकुश, मोदक और दाँत। वाहन मूषक (चूहा) और पत्नियाँ ऋद्धि-सिद्धि।

प्रसिद्ध प्रसंगों में वेदव्यास द्वारा महाभारत की कथा गणेश से लिखवाना, चंद्रमा के साथ उनका वाक्-युद्ध (चंद्रदर्शन का व्रत), और कुबेर के साथ अन्न-दान की कथा आती हैं। एक बार उनका सिर काटे जाने के बाद परशुराम के फरसे से भी उनका दाँत टूटा, जिससे वे 'एकदंत' हुए।

गणेश चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी) उनका प्रमुख उत्सव है, जो महाराष्ट्र में विशेष धूम से मनाया जाता है। सिद्धिविनायक (मुंबई), अष्टविनायक और मोरगाँव आदि उनके प्रसिद्ध तीर्थ हैं।

नाते-रिश्ते

  • पिता: शिव
  • माता: पार्वती
  • भाई: कार्तिकेय
  • पत्नी: ऋद्धि-सिद्धि
  • वाहन: मूषक

प्रसिद्ध कथन

वंदना — "वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥"
मूल मंत्र — "ॐ गं गणपतये नमः।"
परंपरा में गणेश को विद्या, बुद्धि और सिद्धि का अधिष्ठाता तथा समस्त गणों का स्वामी कहा गया है। (भावानुवाद)

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स्रोत: गणेश पुराण; शिव पुराण