दक्ष
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: प्रजापति, दक्ष प्रजापति, कन्यादाता, पशुपति-विरोधी
दक्ष 'प्रजापति' हैं — ब्रह्मा के मानस पुत्रों में एक और सृष्टि-विस्तार के प्रमुख आधार। पुराणों के अनुसार उन्होंने अनेक कन्याओं को जन्म दिया, जिनके विवाह से देवता, ऋषि, नक्षत्र और मनुष्य-वंश चले। दक्ष का चरित्र सृष्टि-व्यवस्था के साथ-साथ शिव के प्रति उनके वैमनस्य के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है।
उनकी कन्याओं में — 27 नक्षत्र-कन्याएँ चंद्र को, 13 कन्याएँ कश्यप को, तथा सती (दाक्षायणी) शिव को दी गईं। सती शिव की प्रथम पत्नी थीं। दक्ष ब्रह्मा के अंगुष्ठ (या मन) से उत्पन्न माने जाते हैं।
प्रसिद्ध प्रसंग 'दक्षयज्ञ' है — एक बार दक्ष ने विराट यज्ञ का आयोजन किया, पर शिव को निमंत्रित नहीं किया (शिव को अपना शत्रु मानकर)। सती बिना निमंत्रण यज्ञ में गईं और पिता के शिव-अपमान को सह न सकीं; उन्होंने योगाग्नि से स्वयं को भस्म कर दिया। इससे क्रुद्ध शिव ने अपने गण वीरभद्र को भेजकर दक्षयज्ञ का विध्वंस कराया और दक्ष का सिर काट डाला (बाद में बकरे का सिर जोड़ा गया)। पुनः जन्म लेकर सती हिमालय-पुत्री पार्वती हुईं और शिव से विवाह किया।
दक्ष की गाथा शिव पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण में विस्तार से मिलती है।
नाते-रिश्ते
- पिता: ब्रह्मा (मानस पुत्र)
- पुत्री: सती, 27 नक्षत्र-कन्याएँ
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: शिव पुराण; श्रीमद्भागवत पुराण; विष्णु पुराण