विश्वामित्र
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: विश्वामित्र, कौशिक, राजर्षि, ब्रह्मर्षि, गायत्री-द्रष्टा
विश्वामित्र कौशिक वंश के राजा थे, जिन्होंने क्षत्रिय-बल से ऊपर उठकर तपस्या द्वारा 'ब्रह्मर्षि' पद प्राप्त किया — यह भारतीय परंपरा में संकल्प-बल का महान उदाहरण है। वे राम और लक्ष्मण के गुरु बने और उन्हें दिव्य अस्त्रों का ज्ञान दिया।
उनकी कथा रामायण के बालकांड में विस्तृत है। प्रारम्भ में वे राजा थे, पर एक बार वसिष्ठ के आश्रम में उनकी विशाल सेना को नंदिनी गौ के सामने पराजित होते देख वे समझ गए कि ब्रह्म-बल क्षत्रिय-बल से बड़ा है। तब उन्होंने राज्य त्यागकर घोर तपस्या की। अनेक परीक्षाओं — इंद्र द्वारा भेजी अप्सरा मेनका के मोह, दीर्घ तपस्या — के बाद उन्हें ब्रह्मर्षि की उपाधि मिली।
प्रसिद्ध प्रसंगों में — गायत्री मंत्र का दर्शन (ऋग्वेद 3.62.10), मेनका से शकुंतला का जन्म, त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेजने का प्रयास (जिससे त्रिशंकु आकाश में लटक गए), हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा की परीक्षा, तथा राम-लक्ष्मण को यज्ञ-रक्षा हेतु ले जाना प्रमुख हैं। उन्होंने राम को बला-अतिबला विद्या तथा दिव्य अस्त्र प्रदान किए।
विश्वामित्र की गाथा रामायण (बालकांड) तथा ऋग्वेद (गायत्री मंत्र) में विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
नाते-रिश्ते
- शिष्य: राम, लक्ष्मण
- पुत्री: शकुंतला (मेनका से)
- वंश: कौशिक
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: रामायण (बालकांड); ऋग्वेद (गायत्री मंत्र)