अक्रूर
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: अक्रूर
अक्रूर यदुवंशी सरदार और वसुदेव के निकट संबंधी थे। वे कृष्ण के परम भक्त माने जाते हैं।
कंस ने धनुष-यज्ञ के बहाने अक्रूर को गोकुल भेजा, जिससे कृष्ण और बलराम मथुरा आ सकें। मार्ग में अक्रूर ने कृष्ण के दर्शन का सौभाग्य पाया।
अक्रूर ने कंस के वध में सहयोग दिया और बाद में यादव-सभा में कृष्ण-बलराम के पक्ष में रहे। उन्हें कृष्ण-भक्ति और यदु-हित के प्रतीक के रूप में जाना जाता है।
नाते-रिश्ते
- पिता: स्वफल्क
- मित्र: वसुदेव
- भक्त: कृष्ण
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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण – दशम स्कन्ध