सप्तर्षि
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: सप्त ऋषि, सप्तर्षि मंडल
सप्तर्षि सात महान ऋषियों का समूह हैं जो लोक में ज्ञान-परंपरा को सुरक्षित रखते हैं। आकाश में सप्तर्षि मंडल ध्रुव तारे की परिक्रमा करता है और परंपरा में इन तारों को इन्हीं ऋषियों से जोड़ा जाता है।
वर्तमान सातवें वैवस्वत मन्वंतर के सप्तर्षि हैं — कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भरद्वाज। यही नाम-सूची विष्णु पुराण और बृहदारण्यक उपनिषद में मिलती है।
हर मन्वंतर में सप्तर्षि बदलते रहते हैं। परंपरा में दो नामावलियाँ प्रचलित हैं — एक जो आकाश के तारों से जुड़ी है (मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वशिष्ठ), और दूसरी वर्तमान मन्वंतर की। महाभारत की शांति पर्व और शतपथ ब्राह्मण में भी इनके नाम मिलते हैं।
सप्तर्षि मंडल में वशिष्ठ की पत्नी अरुंधती को एक अलग तारे के रूप में माना जाता है। परंपरा के अनुसार ये ऋषि कल्प के अंत तक रहने वाले, दिव्य देहधारी और ज्ञानी माने गए हैं।
नाते-रिश्ते
- सदस्य: कश्यप
- सदस्य: अत्रि
- सदस्य: वशिष्ठ
- सदस्य: विश्वामित्र
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण (स्कंध 8), बृहदारण्यक उपनिषद