चित्रगुप्त
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: चित्रगुप्त, कायस्थ, चित्रदेव
चित्रगुप्त यमराज के दरबार के लेखाकार (महालेखाधिकारी) हैं, जो प्रत्येक जीव के पाप और पुण्य का हिसाब रखते हैं। 'चित्र' (चित्त/दृश्य) और 'गुप्त' (छिपा) से बना यह नाम बताता है कि वे गुप्त से गुप्त कर्म भी जानते और दर्ज करते हैं।
पद्म पुराण और गरुड़ पुराण के अनुसार चित्रगुप्त ब्रह्मा के चित्त या शरीर से उत्पन्न हुए; ब्रह्मा की काया से जन्म लेने के कारण उन्हें 'कायस्थ' कहा गया।
उनके हाथ में 'अग्रसंधानी' नामक दिव्य पंजिका रहती है। मृत्यु के बाद यमराज इसी लेखे के आधार पर जीव को स्वर्ग, नरक या पुनर्जन्म का निर्णय देते हैं। कार्तिक शुक्ल द्वितीया (यमद्वितीया) को उनकी पूजा होती है।
कायस्थ समाज चित्रगुप्त को अपना आदि पुरुष मानता है और उनके बारह पुत्रों से कायस्थ वंशों की परंपरा जोड़ी जाती है।
नाते-रिश्ते
- जन्म: ब्रह्मा के शरीर से
- स्वामी: यम
- वंश: कायस्थ
संबंधित
स्रोत: गरुड़ पुराण, पद्म पुराण