कामदेव
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: मन्मथ, मदन, अनंग, कंदर्प, पुष्पबाण, मकरध्वज
कामदेव प्रेम, काम-वासना और सौंदर्य-बोध के देवता हैं। वे मनुष्य तथा देवताओं के हृदय में प्रेम का संचार करते हैं और सृष्टि-प्रवाह को चलाते हैं। उनकी पत्नी रति हैं और मित्र वसंत (ऋतुराज) — इसीलिए वसंत-ऋतु को काम-उत्सव का समय माना जाता है।
उनका स्वरूप सुंदर युवक का है, जो धनुष-बाण धारण करते हैं — धनुष गन्ने का और पाँच बाण पुष्पों के। इसीलिए उन्हें 'पुष्पबाण' और 'पुष्पधन्वा' कहा जाता है। उनका वाहन मकर (मगर) या पक्षी है और वे 'मकरध्वज' कहलाते हैं। 'मन्मथ' (मन को मथने वाले) और 'मदन' उनके प्रसिद्ध नाम हैं।
सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रसंग — तारकासुर के वध के लिए जब देवताओं ने शिव का ध्यान भंग करने हेतु कामदेव को भेजा, तब कामदेव के पुष्पबाण से शिव का ध्यान टूटा। क्रुद्ध शिव ने तृतीय नेत्र से उन्हें भस्म कर दिया — इसीलिए वे 'अनंग' (अशरीरी) हुए। रति के विलाप पर शिव ने वरदान दिया कि कामदेव अशरीरी रूप में ही जगत् में व्याप्त रहेंगे; भागवत के अनुसार उन्होंने कृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनर्जन्म लिया।
कामदेव की चर्चा शिव पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण तथा कालिदास के कुमारसंभव में मिलती है।
नाते-रिश्ते
- पत्नी: रति
- मित्र: वसंत
- वाहन: मकर
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
कृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनर्जन्म
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: शिव पुराण; श्रीमद्भागवत पुराण; कुमारसंभव