अश्विनी कुमार
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: अश्विनीकुमार, अश्विनौ, नासत्य, दस्र, अश्वदेव
अश्विनी कुमार वैदिक परंपरा के जुड़वाँ देवता हैं — नासत्य और दस्र। वे सूर्य (विवस्वान) और संज्ञा के पुत्र माने जाते हैं; संज्ञा के घोड़ी (वडवा) रूप और सूर्य के अश्व रूप से इनका जन्म हुआ।
वे देवताओं के वैद्य हैं और प्रभात के समय सुनहरे रथ पर निकलते हैं, जिसे घोड़े खींचते हैं। ऋग्वेद में इनका उल्लेख सैकड़ों बार है और पचास से अधिक ऋचाएँ केवल इनकी स्तुति की हैं।
चिकित्सा-प्रसंग — इन्होंने च्यवन ऋषि को युवा किया, विश्पला को लोहे का पैर लगाया, ऋजाश्व को दृष्टि और नार्षद को श्रवण दिया, तथा दधीचि के सिर के स्थान पर अश्व का सिर लगाकर मधुविद्या प्राप्त की।
महाभारत में नकुल और सहदेव अश्विनी कुमारों के पुत्र (अश्विनेय) माने जाते हैं। इन्हें आयुर्वेद के आदि आचार्य भी कहा जाता है।
नाते-रिश्ते
- पिता: सूर्य
- माता: संज्ञा
- पुत्र: नकुल
- पुत्र: सहदेव
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: ऋग्वेद, महाभारत, ब्रह्म पुराण