राजा नल
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: नल, निषधराज नल
नल निषध देश के राजा और वीरसेन के पुत्र थे। वे अश्व-विद्या में निपुण और दमयंती के पति थे।
हंस के माध्यम से नल और दमयंती के प्रेम की कथा आरंभ हुई। स्वयंवर में दमयंती ने उन्हें वरा। कलि के प्रभाव से नल जुए में अपना राज्य और सर्वस्व हार गए।
वन में अलग होने पर नल ने सर्प का रूप धारण किया और अंत में दमयंती तथा ऋतुपर्ण के सहयोग से विद्या और राज्य पुनः प्राप्त किया। नल धैर्य, विद्या और पुनर्स्थापन के प्रतीक हैं।
नाते-रिश्ते
- पत्नी: दमयंती
- पिता: वीरसेन
- सखा: ऋतुपर्ण
पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध
कलि के प्रभाव से जुए में सर्वस्व खोया; सर्परूप धारण कर फिर मुक्त हुए।
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स्रोत: महाभारत – वन पर्व