वामन अवतार
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: वामन, त्रिविक्रम, पंचम अवतार, बलि-नियंता
वामन अवतार विष्णु के दशावतारों में पंचम है — बौने ब्राह्मण बालक का रूप। इसका प्रयोजन दैत्यराज बलि के अहंकार का भंग और इंद्र का स्वर्ग लौटाना था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान ने अदिति और कश्यप के पुत्र रूप में वामन के रूप में जन्म लिया।
कथा के अनुसार बलि ने अश्वमेध यज्ञ किया, जिसमें वामन ब्राह्मण-बालक के रूप में पहुँचे और दान माँगा — तीन पग भूमि। गुरु शुक्राचार्य ने बलि को चेताया कि यह विष्णु हैं, पर बलि ने दान का वचन नहीं तोड़ा। तब वामन ने विराट रूप (त्रिविक्रम) धारण किया और पहले पग में पृथ्वी, दूसरे में स्वर्ग नाप लिया; तीसरा पग रखने को स्थान न रहा।
बलि ने अपना सिर झुका दिया और भगवान का तीसरा पग अपने मस्तक पर स्वीकार किया। भगवान प्रसन्न हुए और बलि को सुतल लोक में राज्य तथा अपना सान्निध्य (द्वारपाल रूप) प्रदान किया। कहा जाता है कि भगवान के पग के जल से ब्रह्मा के कमंडल में गंगा प्रकट हुई। 'त्रिविक्रम' के रूप में यह अवतार वैदिक त्रिविक्रम-कथा का पुराण-विस्तार है।
वामन अवतार की कथा श्रीमद्भागवत पुराण (अष्टम स्कंध) तथा विष्णु पुराण में विस्तृत है।
नाते-रिश्ते
- अवतार: विष्णु (पंचम)
- पिता: कश्यप
- माता: अदिति
- सम्बन्ध: बलि
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण (स्कंध 8); विष्णु पुराण