पृथ्वी
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: भूमि, भूदेवी, धरित्री, वसुधा, धरा, पृथिवी
पृथ्वी (भू, धरित्री, वसुधा, धरा) भूमि की देवी हैं और माता के रूप में पूजित हैं। वेदों से लेकर पुराणों तक इनका स्थान अत्यंत प्राचीन और व्यापक है; ये समस्त जीवों की धारण करने वाली माता मानी गई हैं।
विष्णु पुराण के अनुसार राजा पृथु ने गाय का रूप धारण करती पृथ्वी का दोहन किया और उनसे अन्न-औषधि प्राप्त की। पृथु के पालन-पोषण से प्रसन्न होकर पृथ्वी ने उनका नाम अपने ऊपर रखा और तब से यह 'पृथ्वी' कहलाई।
वराह अवतार में विष्णु ने हिरण्याक्ष का वध करके पृथ्वी को जल में डूबने से बचाया। रामायण में सीता पृथ्वी की पुत्री (भूमिजा) कही गई हैं, और नरकासुर को पृथ्वी तथा वराह का पुत्र माना जाता है।
नाते-रिश्ते
- पुत्री: सीता
- पुत्र: नरकासुर
- रक्षक: वराह
- दोहनकर्ता: पृथु
प्रसिद्ध कथन
अथर्ववेद (१२.१.१२) में पृथ्वी-सूक्त की प्रसिद्ध पंक्ति है — 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः' (भूमि माता है, मैं उसका पुत्र हूँ)।
संबंधित
स्रोत: विष्णु पुराण, अथर्ववेद