नवग्रह
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: नवग्रह, नौ ग्रह, ग्रह
नवग्रह हिन्दू ज्योतिष और पुराण-परंपरा के नौ ग्रह-देवता हैं — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति (गुरु), शुक्र, शनि, तथा छाया-ग्रह राहु और केतु।
'ग्रह' शब्द का अर्थ है 'जो पकड़ ले या ग्रहण करे' — अर्थात् ये केवल खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि जीवन को प्रभावित करने वाली शक्तियाँ माने जाते हैं। सूर्य को केंद्र में रखकर नवग्रह की स्थापना होती है; प्रत्येक का अपना वार, रंग, अनाज, रत्न और वाहन है।
सात ग्रह दृश्य पिंड हैं, जबकि राहु-केतु चंद्र-पथ और सूर्य-पथ के प्रतिच्छेद बिंदु (चंद्र-पात) हैं; इसीलिए इन्हें छाया-ग्रह कहा जाता है।
ज्योतिष में इनके कारकत्व, उच्च-नीच राशियाँ और उपाय बताए गए हैं। अनेक मंदिरों में नवग्रह सन्निधि में इनकी पूजा होती है और परिक्रमा की परंपरा है।
नाते-रिश्ते
- सदस्य: सूर्य
- सदस्य: चंद्र
- सदस्य: शनि
- सदस्य: राहु
- सदस्य: केतु
संबंधित
स्रोत: ज्योतिष शास्त्र, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण