हलाहल
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: हलाहल, कालकूट, विष
हलाहल (कालकूट) समुद्र मंथन से निकला सबसे पहला और अत्यंत घातक विष था। इसकी ज्वाला से देवता और असुर दोनों पीड़ित होने लगे।
तब सबने मिलकर भगवान शिव की प्रार्थना की। शिव ने उस विष को हथेली में लेकर पी लिया, पर देवी पार्वती ने उसे कंठ से नीचे उतरने नहीं दिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए।
कथा के अनुसार शिव की हथेली से थोड़ा विष पृथ्वी पर गिरा, जिससे सर्प, बिच्छू आदि विषैले जीव उत्पन्न हुए।
हलाहल को समुद्र मंथन के चौदह रत्नों में पहला माना जाता है; कुछ सूचियों में इसे रत्न न मानकर विष के रूप में अलग गिना जाता है।
नाते-रिश्ते
- जन्म: समुद्र मंथन
- पानकर्ता: शिव
- संबंधी: वासुकि
संबंधित
स्रोत: समुद्र मंथन प्रसंग, विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण