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पृथु

वेद एवं पुराण

अन्य नाम: राजा पृथु, पृथु चक्रवर्ती

अवतारविष्णुपृथ्वीदोहनराजा

पृथु राजा वेन के पुत्र थे और विष्णु के आंशिक अवतार माने जाते हैं। वे स्वायंभुव मनु की परंपरा में आते हैं। जब वेन अधर्मी हो गए, तब ऋषियों ने उनके शरीर से पृथु की उत्पत्ति की।

पृथु के राज्य में अन्न और औषधि का अभाव था। क्रुद्ध होकर पृथु ने पृथ्वी का वध करने का विचार किया, तब पृथ्वी ने गौ का रूप धारण कर दोहन का प्रस्ताव रखा।

पृथु ने पृथ्वी का दोहन करके अन्न, रस और समस्त ओषधियाँ प्राप्त कीं, जिससे प्रजा का पालन हुआ। पृथ्वी ने प्रसन्न होकर अपना नाम पृथु पर रखा और उन्हें पुत्र के समान माना। इस प्रकार पृथु को आदर्श राजा और पृथ्वी के पालक के रूप में पूजा जाता है।

नाते-रिश्ते

  • पिता: वेन
  • वंश: स्वायंभुव मनु
  • अंश: विष्णु
  • संबंध: पृथ्वी

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

विष्णु के आंशिक अवतार

संबंधित

विष्णुपृथ्वीमनुअवतार

स्रोत: विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण