भगीरथ
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: भगीरथ, गंगावतरण-कर्ता, सगर-वंशी, भागीरथी
भगीरथ सूर्यवंशी (इक्ष्वाकु) राजा थे — राजा सगर के वंशज। उनका नाम गंगा को पृथ्वी पर लाने की महान तपस्या के लिए अमर हुआ; गंगा को इसी कारण 'भागीरथी' कहा जाता है। उनकी कथा त्याग, संकल्प और पितृ-उद्धार की पराकाष्ठा है।
कथा के अनुसार राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया, पर इंद्र ने यज्ञ-अश्व चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में छिपा दिया। सगर के साठ हज़ार पुत्रों ने वहाँ पहुँचकर कपिल मुनि को चोर मानकर अपमानित किया; मुनि के तेज से वे सब भस्म हो गए। उनकी मुक्ति के लिए गंगा का पृथ्वी पर आना आवश्यक था।
भगीरथ ने घोर तपस्या करके ब्रह्मा को प्रसन्न किया और गंगा को पृथ्वी पर उतरने का वरदान पाया। पर गंगा के वेग को सहने की शक्ति पृथ्वी में न थी — इसलिए भगीरथ ने शिव की उपासना की, और शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को रोककर उनका वेग शांत किया। फिर भगीरथ अपने रथ के आगे-आगे चले और गंगा उनके पीछे-पीछे बहती गई, जिससे सगर-पुत्रों की अस्थियाँ पवित्र हुईं और उन्हें मुक्ति मिली।
भगीरथ की कथा रामायण (बालकांड) और विष्णु पुराण में विस्तृत है।
नाते-रिश्ते
- पूर्वज: राजा सगर
- वंश: सूर्यवंश (इक्ष्वाकु)
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: रामायण (बालकांड); विष्णु पुराण