अगस्त्य
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: अगस्त्य मुनि, कुंभयोनि, सप्तर्षि, दक्षिण-गुरु
अगस्त्य सप्तर्षियों में एक और भारतीय परंपरा के महान ऋषि हैं — जिन्हें 'कुंभयोनि' कहा जाता है क्योंकि उनका जन्म मित्रावरुण के तेज से एक कलश में हुआ माना जाता है। उन्हें दक्षिण भारत (दक्षिणापथ) का आदि-गुरु और तमिल भाषा-परंपरा के प्रवर्तक माना जाता है। उनकी पत्नी लोपामुद्रा हैं।
उनका प्रसिद्धतम प्रसंग वातापि-इल्वल का वध है — इल्वल नामक राक्षस भोजन में वातापि (मेष रूप) को खिलाकर पेट में विस्फोट कराता और यात्रियों को मार डालता था। अगस्त्य ने उस आमंत्रण को स्वीकार किया, वातापि को पचा लिया और इल्वल को भी भस्म कर दिया।
दूसरा प्रसिद्ध प्रसंग 'समुद्र-पान' है — जब कालकेय नामक दैत्य समुद्र में छिपकर ऋषियों को सताने लगे, तब अगस्त्य ने समुद्र का जल पी लिया, जिससे दैत्य प्रकट हो गए और नष्ट हुए। कहा जाता है कि वह जल पचाने के लिए उन्हें हिमालय जाना पड़ा। रामायण में अगस्त्य ने राम को दिव्य धनुष तथा आदित्यहृदय स्तोत्र प्रदान किया।
अगस्त्य की गाथा रामायण, विष्णु पुराण तथा ऋग्वेद (अगस्त्य-सूक्तों) में मिलती है।
नाते-रिश्ते
- पत्नी: लोपामुद्रा
- जन्म: मित्रावरुण के तेज से (कुंभयोनि)
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: रामायण; विष्णु पुराण; ऋग्वेद