कल्कि अवतार
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: कल्कि, दशम अवतार, भविष्य-अवतार, कलियुग-अंत
कल्कि विष्णु के दशावतारों में अंतिम और भविष्य में होने वाले अवतार हैं। परंपरा के अनुसार कलियुग के अंतिम चरण में जब धर्म लुप्तप्राय हो जाएगा और अधर्म अपने चरम पर होगा, तब भगवान कल्कि के रूप में प्रकट होंगे। यह अवतार अभी नहीं हुआ है — यह भविष्य-काल की घोषणा है।
कल्कि पुराण तथा भविष्य पुराण के अनुसार भगवान 'शंभल' नामक ग्राम में विष्णुयश नामक ब्राह्मण के पुत्र रूप में जन्म लेंगे। उनका वाहन श्वेत अश्व 'देवदत्त' होगा और हाथ में चमकता खड्ग। वे पृथ्वी पर फैले पाप, अत्याचार और अधर्म का नाश करेंगे, दुष्ट शासकों का संहार करेंगे, और धर्म की पुनः स्थापना करेंगे।
कहा जाता है कि कल्कि के आगमन से कलियुग का अंत होगा और सतयुग (कृतयुग) का पुनः आरम्भ होगा। परंपरा के अनुसार परशुराम उनके गुरु होंगे और कल्कि उनसे दिव्य अस्त्र-विद्या प्राप्त करेंगे। इस प्रकार कल्कि अवतार धर्म-रक्षा के चक्र (युग-परिवर्तन) का अंतिम बिंदु है।
कल्कि की भविष्यवाणी विष्णु पुराण, भविष्य पुराण तथा कल्कि पुराण में वर्णित है।
नाते-रिश्ते
- अवतार: विष्णु (दशम)
- पिता: विष्णुयश
- गुरु: परशुराम
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: विष्णु पुराण; भविष्य पुराण; कल्कि पुराण