शनि
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: शनि, शनैश्चर, शनि देव, शनिदेव
शनि (शनैश्चर) नवग्रहों में से एक हैं और कर्म, अनुशासन तथा न्याय के देवता माने जाते हैं। नाम का अर्थ है 'धीरे-धीरे चलने वाला' — वे राशिचक्र में सबसे धीमे चलते हैं, एक राशि में लगभग ढाई वर्ष रहते हैं।
वंश — शनि सूर्य और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। ब्रह्म पुराण में वर्णन है कि छाया से सावर्णि मनु और शनैश्चर उत्पन्न हुए; जन्म के समय शनि की दृष्टि से सूर्य का रूप प्रभावित हुआ, इसी कारण उन्हें ग्रहों में प्रभावशाली माना गया।
शनि धैर्य और कर्म की परीक्षा लेने वाले ग्रह माने जाते हैं; 'साढ़ेसाती' और 'ढैया' इनसे जुड़ी मान्यताएँ हैं। वाहन कौआ (काक) है, रंग काला-नीला, और दान-धर्म तथा शनिवार के व्रत से इन्हें प्रसन्न किया जाता है।
रामायण और पुराणों में शनि की कथा हनुमान से भी जुड़ी है। वे शनिवार के स्वामी हैं।
नाते-रिश्ते
- पिता: सूर्य
- माता: छाया
- भाई: यम
- वाहन: कौआ
- वार: शनिवार
संबंधित
स्रोत: ब्रह्म पुराण, नवग्रह प्रसंग, ज्योतिष ग्रंथ