कामधेनु
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: कामधेनु, सुरभि, कामधुक, नंदिनी
कामधेनु एक दिव्य गाय हैं जो इच्छाओं को पूर्ण करने वाली मानी जाती हैं। समुद्र मंथन में हलाहल के बाद वे रत्न के रूप में प्रकट हुईं और ऋषियों ने यज्ञ-कार्य के लिए उन्हें स्वीकार किया।
उन्हें 'सुरभि' और सभी गायों की माता कहा जाता है। उनका दूध अमृत के समान और यज्ञों के लिए सर्वोत्तम माना गया। जहाँ कामधेनु रहती हैं, वहाँ धन, सुख और समृद्धि का वास माना जाता है।
वशिष्ठ ऋषि की गाय 'नंदिनी' को भी कामधेनु का ही रूप माना जाता है। विश्वामित्र ने इसी नंदिनी को पाने की इच्छा से वशिष्ठ से याचना की, और असफल होने पर उसे छीनने का प्रयास किया — यह प्रसंग वाल्मीकि रामायण (बालकांड) में है।
परंपरा में कामधेनु को गो-माता के रूप में पूजा जाता है।
नाते-रिश्ते
- जन्म: समुद्र मंथन
- स्वामी: वशिष्ठ
- रूप: नंदिनी
- संबंधी: इंद्र
संबंधित
स्रोत: समुद्र मंथन प्रसंग, श्रीमद्भागवत पुराण, विष्णु पुराण, वाल्मीकि रामायण