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हरिश्चंद्र

वेद एवं पुराण

अन्य नाम: सत्यवादी हरिश्चंद्र, सत्यव्रत, इक्ष्वाकु-वंशी, सत्य-प्रतीक

राजासूर्यवंशसत्यधर्म

हरिश्चंद्र सूर्यवंशी (इक्ष्वाकु) राजा और सत्यव्रत के लिए अमर हैं — भारतीय परंपरा में 'सत्यवादी हरिश्चंद्र' सत्यनिष्ठा का पर्याय बन गया। उनकी कथा यह दिखाती है कि धर्म और सत्य के मार्ग पर सर्वस्व अर्पित करने वाला अंततः देवताओं द्वारा सहायता पाता है।

कथा के अनुसार विश्वामित्र ने हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा की परीक्षा ली। एक बार हरिश्चंद्र ने स्वप्न में कहा कि वे विश्वामित्र को अपना राज्य दान कर देंगे; विश्वामित्र ने जागते ही वचन माँग लिया। हरिश्चंद्र ने राज्य, पत्नी शैव्या और पुत्र रोहित सहित सब कुछ विश्वामित्र को सौंप दिया और स्वयं दक्षिणा चुकाने के लिए काशी में एक चांडाल के यहाँ दास बन गए।

आगे उन्हें श्मशान में रहकर शव-दाह का कार्य करना पड़ा और नियम बनाया कि कोई मृत-देह बिना शुल्क नहीं जलेगी। एक दिन उनकी पत्नी अपने मृत पुत्र रोहित को दाह के लिए लाई, पर शुल्क न दे सकी। सत्य के लिए हरिश्चंद्र ने स्वयं पत्नी-पुत्र की सहायता तक न की। इस पर देवता प्रकट हुए, विश्वामित्र ने उनकी सत्यनिष्ठा स्वीकार की और उन्हें पुनः राज्य व परिवार दिया; यहाँ तक कि देवराज इंद्र के वरदान से पुत्र जीवित हुआ।

हरिश्चंद्र की कथा मार्कंडेय पुराण, देवीभागवत पुराण तथा ऐतरेय ब्राह्मण में वर्णित है।

नाते-रिश्ते

  • पत्नी: शैव्या
  • पुत्र: रोहित
  • वंश: इक्ष्वाकु (सूर्यवंश)

प्रसिद्ध कथन

हरिश्चंद्र का संकल्प — सत्य के मार्ग पर चलते हुए वे राज्य, पत्नी, पुत्र सब कुछ त्यागने को तैयार रहे। (भावानुवाद)
विश्वामित्र की परीक्षा में हरिश्चंद्र ने कहा — वचन दिया है तो उसे निभाना ही होगा, चाहे सर्वस्व जाए। (भावानुवाद)
मंत्र — "ॐ हरिश्चंद्राय नमः।"

संबंधित

विश्वामित्रकाशीसूर्यमनुधर्मअयोध्या

स्रोत: मार्कंडेय पुराण; देवीभागवत पुराण; ऐतरेय ब्राह्मण