शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

अरुण

वेद एवं पुराण

अन्य नाम: अरुण देव, अरुण सारथि

सूर्यगरुड़सारथिजटायुसम्पाति

अरुण कश्यप और विनता के पुत्र तथा पक्षीराज गरुड़ के बड़े भाई हैं। अंडे से समय से पूर्व जन्म लेने के कारण इनका रूप पूर्ण नहीं बना और उनका वर्ण अरुण (लालिमायुक्त) हो गया, इसी से इनका नाम 'अरुण' पड़ा।

अरुण सूर्य के रथ के सारथि बने। मान्यता है कि वे रथ के अग्रभाग में स्थित होकर सूर्य की तीव्र किरणों को सहते हैं और इसी कारण सूर्योदय से पूर्व 'अरुणोदय' होता है।

अरुण का विवाह श्येनी से हुआ और उनके दो पुत्र हुए — सम्पाति और जटायु। रामायण में जटायु ने सीता की रक्षा के लिए रावण से युद्ध किया। अरुण का वर्णन विष्णु पुराण और रामायण दोनों में मिलता है।

नाते-रिश्ते

  • पिता: कश्यप
  • माता: विनता
  • भाई: गरुड़
  • पत्नी: श्येनी
  • पुत्र: सम्पाति व जटायु

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

अंडे से समय-पूर्व जन्म से अरुण वर्ण की प्राप्ति

प्रसिद्ध कथन

विष्णु पुराण में कश्यप की संतानों के वर्णन में अरुण तथा गरुड़ का उल्लेख है (भावानुवाद)।

संबंधित

गरुड़सूर्यकश्यपजटायुसंपाति

स्रोत: विष्णु पुराण, रामायण