विष्णु
वेद एवं पुराण
अन्य नाम: नारायण, हरि, पालक, शेषशायी, दशावतारी, गरुड़ध्वज
विष्णु त्रिमूर्ति में पालन-कर्ता हैं — जो सृष्टि को धारण करते हैं और धर्म की रक्षा के लिए समय-समय पर अवतरित होते हैं। पुराणों में उनका निवास वैकुंठ है, जहाँ वे क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में विराजते हैं; इसी रूप में उन्हें 'शेषशायी' कहा जाता है। भगवद्गीता में स्वयं कृष्ण उन्हीं का पूर्ण अवतार माने जाते हैं।
उनका स्वरूप चतुर्भुज है — शंख, चक्र, गदा और पद्म धारी; वाहन गरुड़, पत्नी लक्ष्मी और निवास वैकुंठ। भक्तों के लिए वे 'नारायण', 'हरि' और 'मुकुंद' आदि अनेक नामों से पूज्य हैं। विष्णु सहस्रनाम उनके हज़ार नामों का प्रसिद्ध स्तोत्र है, जो भीष्म ने युधिष्ठिर को सुनाया था। शालिग्राम शिला में उनकी पूजा प्रचलित है।
उनके दस प्रमुख अवतार (दशावतार) गिनाए जाते हैं — मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण (बलराम सहित), बुद्ध (कहीं कल्कि पूर्व) और भविष्य का कल्कि। इसके अतिरिक्त हयग्रीव, धन्वंतरि, मोहिनी, नर-नारायण, दत्तात्रेय आदि अनेक अवतार भी वर्णित हैं। उनकी लीलाएँ भक्तों की रक्षा और दुष्टों के संहार के इर्द-गिर्द बुनी गई हैं — प्रह्लाद के लिए नरसिंह, बलि के लिए वामन, अर्जुन के लिए कृष्ण।
विष्णु की महिमा विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण (दशम स्कंध में कृष्ण-लीला), नारद पांचरात्र और भगवद्गीता में विस्तृत है। ऋग्वेद में भी विष्णु के त्रिविक्रम (तीन पगों से तीन लोक नापने) का उल्लेख मिलता है, जो वामन अवतार का बीज है।
नाते-रिश्ते
- पत्नी: लक्ष्मी
- वाहन: गरुड़
- शय्या: शेषनाग
प्रसिद्ध कथन
संबंधित
स्रोत: विष्णु पुराण; श्रीमद्भागवत पुराण; भगवद्गीता